Wednesday, December 9, 2009
क्या एस.अहमद राजस्थान के अगले मुख्य सचिव होंगे?
जिस तरह टी.श्रीनिवासन के अगले मुख्य सचिव बनने कि घोषणा मीडिया ने एडवांस में कर दी थी अब यह कयास लगाया जाने लगा है कि अगले मुख्य सचिव कौन होंगे?अगले साल अगस्त 2010 में टी.श्रीनिवासन सेवा निवृत हो जायेंगे लेकिन मुख्य सचिव बनने कि जोड़ तोड़ अभी से शुरू हो चुकी है.वरिष्टता व योग्यता तो कहने के माप दंड हैं असली योग्यता तो मेनिपुलेशन ,समीकरण बनाना ,योग्यता का कृत्रिम दिखावा,अन्तर राष्ट्रीय योजनाओं के आईडिया को थोडा घुमा फिर कर अपने नाम से प्रस्तुत करना और मुख्य मंत्री जी को खुश करने के लिए किसी भी हद तक नीचे गिरना है.नीचे गिरने कि दौड़ में कौन आगे निकलता है यह देखने कि बात है.वहीँ कुछ अधिकारी अपने आत्म सम्मान के साथ पद का दावा करते हैं एस.अहमद का नाम इस तरह के उम्मीदवारों कि लिस्ट में सबसे ऊपर है.इसका कारण है इनकी अतिरिक्त योग्यताएँ.अल्प संख्यकों के प्रति मुख्य मंत्रीजी का सोफ्ट कोर्नर जगजाहिर है.अहमद जी कि परम मित्र बीनाजी महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रही हैं .और इनका कार्यकाल भी डेढ़ साल ही रहेगा परन्तु सचिवालय में हावी साउथ इंडियन लॉबी कुछ और ही चाहती है.
Friday, December 4, 2009
राजस्थान सरकार को 532 करोड़ का घाटा
गत वर्ष कि तुलना में राजस्थान सरकार को इस वर्ष 532 करोड़ का घाटा हो चूका है और यह घाटा वर्ष के अंत तक इसके दुगने से अधिक का भी हो सकता है.इसके मूलभूत कारणों कि तरफ कोई झांकना भी नहीं चाहता बहुत आसानी से आर्थिक मंदी व छटे वेतन आयोग पर डाला जा रहा है.राजस्व संग्रहण में जो कमी आई है उसके कारण क्या हैं ?सहायता अनुदान क्यों घटा?केंद्रीय अनुदान व सहायता के लिए मिली राशी क्यों खर्च नहीं हुई.गैर कर संग्रहण के लक्ष्य क्यों पूरे नहीं हो रहे?जब पूरे वर्ष के लिए 8419.88 करोड़ उधार का लक्ष्य है और अब तक 7058.57 करोड़ का उधार लिया जा चूका है तब उसे आप किस तरह का वित्तीय प्रबंधन मानेगें?अगर मुख्य मंत्री FRBM कि सही पालना चाहते हैं तो सही कैलिबर के अधिकारी से इसकी निष्पक्ष समीक्षा करवानी चाहिए.इसलिए वित्त विभाग को प्रशासन कि बेकबोन माना जाता था और यहाँ हस्तक्षेप आसानी से संभव नहीं था.जरा एक नजर वाणिज्य सेवा और लेखा सेवा के transfere/promotion पर डालें.राजस्व संग्रहण में कमी और और अनुदान राशी काम खर्च होने का एक राज इनमें भी है.
Monday, November 30, 2009
कैसे होगा कुशासन का अंत ?
एक तरफ मुख्य मंत्री महोदय चिंतन शिविर में कुशासन का अंत कर सुशासन का संकल्प कर रहे हैं वहीँ राजस्थान सरकार का वित्त विभाग मुख्य मंत्री कि costituency में ऊटपटांग निर्णय लेकर सुशासन को कोरी कल्पना बता रहा है.अभी दो महीने पहले दिनांक ११ सितम्बर को वित्त विभाग ने काफी लंबे व्यायाम के बाद कुछ तबादला सूचियाँ जारी कि थी जिसमें आज तक भी त्रुटियों के संशोधन चल रहे हैं इन में कीर्ति कछवाहा को प्रमोशन पर पेंशन विभाग में संयुक्त निदेशक लगाया गया था .उस पर तुर्रा यह कि कीर्ति को लगाने के लिए पेंशन में पहले से कार्यरत गोयल को मात्र एक वर्ष में ही यंहा से हटा दिया गया जबकि गोयल ने पेंशनरो को राहत पहुँचाने में कोई कसर नहीं रखी थी.कीर्ति को लगा कि इस विभाग में जरुर काफी फायदा होगा तो लिस्ट से पहले जयपुर के चक्कर काटे पता नहीं क्या जादू चलाया और मनोवांछित पद पर कब्ज़ा कर लिया चाहे इसके लिए उन्हें अपने से वरिष्ठ अधिकारी को धक्का देना पड़ा पर नेतिकता को तो ये पहले ही तिलांजलि दे चुके हैं जो उनको नजदीक से जानते हैं वे तो उनके बारे में बहुत कुछ बताते हैं व्यक्तिगत जीवन से लेकर मेडिकल कॉलेज तक में इनके कारनामों कि धूम रही है.कल दिनांक 30.11.09 को एक सिंगल आर्डर द्वारा कीर्ति कछवाहा को तकनिकी शिक्षा में मुख्य लेखाधिकारी लगा दिया गया.
जहाँ एक तरफ सरकार तबादला नीति कि बात करती है कोई अधिकारी प्रमुख शासन सचिव से तबादले के लिए मिलता है तो कहा जाता है अभी तो तुम्हे सिर्फ इतने महीने ही हुए हैं दो साल तक काम करो बेचारा सरकार कि मज़बूरी समझने कि कोशिश कर ही रहा होता है कि मात्र दो माह में बिना किसी कारण के हुए तबादले को देख कर सर पीट लेता है .वित्त विभाग कि वेब साईट पर पड़ी तबादला नीति तो एक आई वाश है जिस तरह चिंतन शिविर है.
जहाँ एक तरफ सरकार तबादला नीति कि बात करती है कोई अधिकारी प्रमुख शासन सचिव से तबादले के लिए मिलता है तो कहा जाता है अभी तो तुम्हे सिर्फ इतने महीने ही हुए हैं दो साल तक काम करो बेचारा सरकार कि मज़बूरी समझने कि कोशिश कर ही रहा होता है कि मात्र दो माह में बिना किसी कारण के हुए तबादले को देख कर सर पीट लेता है .वित्त विभाग कि वेब साईट पर पड़ी तबादला नीति तो एक आई वाश है जिस तरह चिंतन शिविर है.
Thursday, November 26, 2009
राजस्थान लेखा सेवा परिषद् का भूमि घोटाला
राजस्थान लेखा सेवा परिषद् को राज्य सरकार ने सस्ती दर से जमीन दी ताकि अपने घर का सपना देखने वाले लेखाधिकारियों का यह सपना पूरा हो सके.राजस्थान लेखा सेवा परिषद् के पदाधिकारियों ने इस अवसर का पूर्ण उपयोग अपने निहित स्वार्थों कि पूर्ती में किया.ऐसा चक्कर घुमाया कि सब चक्कर खा गए.बड़ी ही खूबसूरती से लाखों के वारे न्यारे किये गए.जब लीज डीड कि राशी का नोटिस आया तब बात समझ में आई पर तब तक खेल खेला जा चूका था.सांप निकलने पर लाठी पीटी जाने लगी.असंतुष्टों ने पैसे जमा कराने में आना कानी कि.उन्हें समझाया गया जमीन के दाम बढ चुके हैं .ठगे गए लोगों ने सभी तथ्यों समेत एक लम्बी चोडी शिकायत वित्त विभाग को भेजी.वित्त विभाग ने उस पर कोई कार्यवाही नहीं कर दाखिल दफ्तर कर दिया.घोटाले वालों के ऊँचे रसूखात के चलते लगता तो नहीं है कि कोई कार्यवाही होगी पर ठगे गए लोग भी कृत संकल्प हैं कि आसानी से पीछा नहीं छोड़ेंगे.अगर जांच किसी और एजेंसी ने कि तो वित्त विभाग भी कठघरे में होगा.
Thursday, November 12, 2009
राज्य निर्वाचन आयोग की अनुमति प्राप्त करली गयी है
यह परम्परा रही है कि चुनाव कि घोषणा के बाद आचार संहिता लागु हो जाती है और जब तक अति आवश्यक न हो कोई प्रशासनिक फेर बदल नहीं किया जाता.इसके पीछे निष्पक्ष चुनाव कि मंशा है और भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है जहाँ चुनाव आयोग ,आचार संहिता कि पूरी पालना करवाता है.पर जब वित्त विभाग लिख कर भेजता है कि ये सभी तबादले चुनाव पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे तो चुनाव आयोग भी सहमती दे देता है.दिनांक 22.10.09 को आचार संहिता लगने के बाद वित्त विभाग चार तबादला सूची जारी कर चूका है जिसमें राजस्थान लेखा सेवा ,आबकारी सेवा ,वाणिज्य सेवा के अधिकारी प्रभावित हुए हैं ,हो सकता है ये अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से चुनाव कार्य नहीं कर रहें हो पर यह तो सर्व विदित है कि अदना से बाबु का तबादला भी बिना राजनेतिक हस्तक्षेप के नहीं होता तो चंदा वसूली के माध्यम बनने वाले अफसरों का तबादला केसे बिना किसी राजनेतिक हस्तक्षेप के हो सकता है.वैसे हमेशा कानून कायदे कि बात करने वाला वित्त विभाग राजनेताओं को दुकानदारी चलाने का सुनहरा अवसर प्रदान कर रहा है.वित्त विभाग कि तो कोई मज़बूरी हो सकती है पर हर आदेश के अंत में यह लिख कर कि "इस आदेश के लिए राज्य
निर्वाचन आयोग की अनुमति प्राप्त करली गयी है" राज्य चुनाव आयोग को भी दलदल में घसीटनेकि नाकाम कोशिश कि जा रही है.
निर्वाचन आयोग की अनुमति प्राप्त करली गयी है" राज्य चुनाव आयोग को भी दलदल में घसीटनेकि नाकाम कोशिश कि जा रही है.
Friday, November 6, 2009
वित्त विभाग जो चाहे कर सकता है
जी हाँ ,यही सुनने को मिला आर.के.सिंह को जिन्हें वित्त विभाग ने या यूँ कहें कि वित्त विभाग के नाम पर असली करता धरता सत्येन्द्र सिंह राजावत ने उन्हें बुला कर यह हिदायत दी कि वित्त विभाग जो चाहे कर सकता है आप नहीं.पहले दिनांक 9.06.09 को एक आदेश निकाल कर वित्त विभाग ने इन्हें वित्तीय सलाहकार राजस्थान खनिज विकास निगम लिमिटेड जयपुर में पदस्थापन किया था.यह विभाग बहुत पहले मर्ज हो चूका था अतः सिंह ने यह तथ्य वित्त विभाग को बताया और इस नाम का कोई कार्यालय नहीं होने से प्रतिदिन पोस्ट द्वारा हाजरी लगाने लगे.आखिर चार माह बाद वित्त विभाग कि नींद खुली और 30.10.09 को आदेश जारी करा कि R.K.Singh का पदस्थापन वित्तीय सलाहकार राजस्थान स्टेट मा.एंड मिनरल्स लिमिटेड जयपुर के पद पर किया हुआ माना जाय.इस तरह वित्त विभाग को चार माह लगे यह तथ्य पता लगाने में कि जहाँ सिंह को लगाया गया है वो विभाग अस्तित्व में ही नहीं है.आदेश कि भाषा से स्पष्ट था कि यह आदेश नौ जून से प्रभावी हैं और अगर अब तक सिंह ने वंहा ज्वाइन नहीं किया है तो उन्हें इस अवधि के लिए कर्त्तव्य से अनुपस्तिथ माना जा सकता है.RSMM jaipur में एक unit incharge है जो वरिष्ट वेतन श्रृंख्ला का अभियंता है.उसके अधीनस्थ सुपर टाइम स्केल का वित्तीय सलाहकार लगाया गया है .लेखा सेवा संवर्ग के अधिकारीयों कि रीड कि हड्डी टूट चुकी है और इसके जिम्मेदार हैं राजावत,पारीक व पंड्या कि तिकडी.इस सेवा के यूनियन के महा सचिव सांखला पहले ही जयपुर से बहार फेंके जा चुके हैं ये बात अलग है कि कुछ होने कि उम्मीद में ये अभी तक जयपुर में ही डेरा डाले पड़े हैं.जो लोग राजावत जी को सुविधा शुल्क चूका कर मलाईदार पोस्टों पर कब्जा कर चूका हैं वो चुप्पी साध कर बैठे हैं.
धन्य है लेखा सेवा ,धन्य है वित्त विभाग और धन्य है राजस्थान सरकार.
धन्य है लेखा सेवा ,धन्य है वित्त विभाग और धन्य है राजस्थान सरकार.
Wednesday, November 4, 2009
वित्त विभाग में दिया तले अँधेरा
राजस्थान सरकार के कुछ विभाग सीधे वित्त विभाग के अधीन आते हैं और सबसे ज्यादा विसंगतियां यहीं देखने को मिलती हैं.शायद इसीको कहते हैं दिया तले अँधेरा.मसलन ऐसा ही एक विभाग है L.F.A.D. यानि स्थानीय निधि अंकेषण विभाग .यह विभाग Local Bodies जैसे नगर पालिकाएं ,हाऊसिंग बोर्ड,पंचायत समितियां व ग्राम पंचायतो का अंकेषण करता है.इसका विभागाध्यक्ष निदेशक होता है जो कि राजस्थान लेखा सेवा का सुपर टाइम स्केल का अधिकारी होता है .संभागीय स्तर पर इसमें संयुक्त निदेशक का पद होता है जो राजस्थान लेखा सेवा के सलेक्शन स्तर के अधिकारी का होता है.पिछले कुछ समय से वित्त विभाग, संभाग में सुपर टाइम स्केल के अधिकारी लगा रहा है .जोधपुर में N.S.Chauhan लगे हैं और जयपुर में आई.एल .राव , जो स्वयं निदेशक स्तर के हैं परन्तु पता नहीं वित्त विभाग कि या इन अधिकारीयों कि ऐसी क्या मजबूरी है जो नेतिकता ,प्रबंधन व मानवीयता के सभी मूल्यों को तिलांजलि देकर यह घालमेल कर रहे हैं.
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